आयुर्वेद (Ayurveda) क्या है, आयुर्वेद का इतिहास, उद्देश्य और लाभ

आयुर्वेद (Ayurveda) क्या है, आयुर्वेद का इतिहास, आयुर्वेद के उद्देश्य और आयुर्वेद के लाभ : आज के इस लेख में जानेंगे आयुर्वेद और उससे जुडी सभी तरह की जानकारियों के बारे में जैसे आयुर्वेद (Ayurveda) क्या है, आयुर्वेद का इतिहास, उद्देश्य और लाभ इत्यादि तो आईए शुरू करते हैं

आयुर्वेद (Ayurveda) क्या है?

आयुर्वेद (Ayurveda) की परंपरा सबसे प्राचीन एवं शाश्वत है। आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति होने के साथ-साथ अपने आप में एक संपूर्ण विज्ञान भी है जो हमें निरोगी बनकर जीवन जीने का मार्गदर्शन देता है। विभिन्न ऋतुओं के अनुसार किए जाने वाले आचरण, खान-पान, रहन-सहन आदि का विस्तृत उल्लेख भी आयुर्वेद में प्राप्त होता है। जीवन में स्वस्थ तथा सुखी रहने के लिए धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष का वर्णन भी आयुर्वेद में ही प्राप्त होता है।

आयुर्वेद (Ayurveda) का इतिहास:

आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है। जो लगभग 5000 वर्ष से भी पुरानी है। चरक, सुश्रुत और कश्यप जैसलमेर सिंह आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद माना है ऐसा माना जाता है कि आयुर्वेद देवताओं की चिकित्सा पद्धति है जिसे कालांतर में मानव कल्याण के लिए देवताओं के वैद्य ने पृथ्वी के महर्षि को दिया था।

हजारों वर्ष पूर्व लिखे गए आयुर्वेद के ग्रंथ रत्न जैसे चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय आदि ग्रंथ आज भी करोड़ों लोगों के द्वारा पढ़े जाते हैं और उनके आरोग्यता का आधार बने हुए हैं।

वर्तमान समय में अनेक चिकित्सा पद्धतियों के प्रचलन में होने और प्रतिकूल परिस्थिति वश आयुर्वेद के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य अवरुद्ध होने के कारण आयुर्वेद-विज्ञान का जनमानस से संपर्क टूटता दिख रहा है। जो हमारी सभ्यता और संस्कृति के लिए एक अत्यंत चिंता का विषय है।

आयुर्वेद का उद्देश्य:

आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगों से बचाव करना है। रोगों से बचाव के लिए ऋषियों ने अनेक बातों पर ध्यान दिया है। आयुर्वेद के अनुसार कोई भी रोग केवल शारीरिक या केवल मानसिक नहीं होता, शारीरिक रोगों का कुप्रभाव मन पर तो मानस रोगों का कुप्रभाव शरीर पर पड़ता है। इसलिए आयुर्वेद में सभी रोगों को मनोदैहिक मानकर चिकित्सा की जाती है।

आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली:

आयुर्वेद का चिकित्सक केवल रोगों के लक्षणों के आधार पर ही नहीं, बल्कि उनके साथ-साथ रोगी की आत्मा, मन, शारीरिक प्रकृति, वात, पित्त, कफ आदि दोषों, मलों तथा धातुओं की स्थिति को ध्यान में रखकर रोगी की चिकित्सा करता है। इसलिए आयुर्वेद लाक्षणिक नहीं सांस्थानिक चिकित्सा पद्धति है आयुर्वेद में प्रयुक्त होने वाली प्रत्येक औषधि रसायन का रूप है, रोग-प्रतिरोधक औषधियों व पथ्य आहार का विस्तृत विवरण विश्व को आयुर्वेद की ही देन है।

आयुर्वेद के लाभ:

औषधि चिकित्सा के साथ-साथ दिनचर्या* प्रात:जागरण, प्रातः खाली

पेट जल-सेवन की विधि, मल त्याग की विधि, दाँत साफ करने की वैज्ञानिक-विधि, शरीर की मालिश तथा व्यायाम से लेकर वस्त्र व आभूषण धारण आदि का विस्तृत विवरण भी आयुर्वेद में किया गया है। इसी तरह से रात्रिचर्या रात्रि में सोने का समय, रात्रि-भोजन तथा आचार आदि का भी सम्यक् वर्णन आयुर्वेद में किया गया है।

विभिन्न ऋतुओं के अनुसार किए जाने वाले आचरण, खान-पान, रहन-सहन आदि का विस्तृत उल्लेख भी आयुर्वेद में प्राप्त होता है। जिसके अनुसार आहार-विहार अपनाने से स्वास्थ्य की रक्षा होती है तथा मनुष्य रोगों से बचारहता है।

जीवन में स्वस्थ तथा सुखी रहने के लिए धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष का वर्णन भी आयुर्वेद में प्राप्त होता है। प्रत्येक मनुष्य का आचरण कैसा होना चाहिए?, व्यवहार की मर्यादाएं क्या हैं? इत्यादि सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय, अध्यात्मिक एवं वैश्विक विचारों का समावेश भी आयुर्वेद में किया गया है,

किसतरह के आचरण से दूर रहना चाहिए, मार्ग-दमन, स्वभाव, व्यवहार, बैठने की विधि, देखने की विधि क्या है, अमर्यादित आचरण से कैसे बचें? आदि विषयों का भी समायोजन किया गया है। सामान्य आचार-विचार, किससे मित्रता करें, किससे मित्रता न करें, किसके साथ कैसे बोलें, कितना बोलें, सरल व सहज कैसे रहें, निरभिमानी होकर अपने चरित्र, स्वभाव एवं प्रकृति को ठीक रखते हुए, दूसरों के दु:ख में शामिल होना तथा अपने सुख में दूसरों को शामिल करना भी आयुर्वेद सिखाता है।

आयुर्वेद भारतीय परम्परा एवं सम्पूर्ण मानव जीवन का शास्त्र तथा जीवन-दर्शन है।

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