Bhastrika Pranayama – Bhastrika Pranayama Benefits, Bhastrika Pranayama Kaise Kare

Bhastrika Pranayama – Bhastrika Pranayama Benefits, Bhastrika Pranayama Kaise Kare

भस्त्रिका प्राणायाम – भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करें, भस्त्रिका प्राणायाम करने के लाभ और सावधानियां

भस्त्रिका प्राणायाम Bhastrika Pranayama

Bhastrika Pranayama – Bhastrika Pranayama Benefits, Bhastrika Pranayama Kaise Kare :-योग और आयुर्वेद ये हमारे प्राचीन धरोहर हैं। इन्ही योग एवं आयुर्वेद में अनेकों तरह के आसन और प्राणायाम की करने की विधि और लाभ आदि का वर्णन किया है, लेकिन क्योंकि कई बार हम अपनी अज्ञानता और समय के आभाव के कारण हम इन्हें कर नही पाते हैं। हमारे ऋषियों एवं महर्षियों ने मुख्य रूप से कुछ ऐसे प्राणायाम को चुना है जिसे हमें नियमित रूप बहुत ही सरलता से कर सकते हैं। जिसमे प्रमुख है भस्त्रिका प्राणायाम, कपालभाती प्राणायाम, वाह्य प्राणायाम, अनुलोम विलोम प्राणायाम, उज्जायी प्राणायाम आदि। आज हम उन्ही प्राणायाम के पहली विधि भस्त्रिका प्राणायाम के बारे में जानेंगे की भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करें, भस्त्रिका प्राणायाम करने की विधि, भस्त्रिका प्राणायाम करने के लाभ, भस्त्रिका प्राणायाम करते समय सावधानी Bhastrika Pranayama – Bhastrika Pranayama Benefits, Bhastrika Pranayama Kaise Kare इत्यादि।

भस्त्रिका प्राणायाम करने की विधि

किसी भी ध्यानोपयोगी आसन जैसे सुखासन, पद्माशन या वज्रासन में सुविधानुसार बैठकर दोनों नासिकाओं से लम्बी-गहरी श्वास को पूरा अन्दर डायाफ्राम तक भरना तथा बाहर सहजता के साथ छोड़ना भस्त्रिका प्राणायाम’ कहलाता है।

भस्त्रिका प्राणायाम करने का समय

वैसे तो हमेशा ही कोई भी आसन अथवा प्राणायाम को सुबह शौच करने के बाद खाली पेट करने की सलाह दी जाती है। लेकिन कई बार इसे साधक संध्या में अथवा भोजन करने के 3-4 घंटे के बाद कर सकते हैं।

ढाई सेकण्ड में श्वास को अन्दर फेफड़ा में लेना एवं ढाई सेकण्ड में श्वास को एक लय के साथ बाहर छोड़ना। इस तरह से बिना रुके एक मिनट में 12 बार भस्त्रिका प्राणायाम होगा। इस तरह से करते हुए एक बार में पाँच मिनट तक करना चाहिए। प्रारम्भ में थकान महसूस होने के कारण थोड़ा रुकना पड़ सकता है। लगभग एक सप्ताह में निरन्तर पाँच मिनट बिना रुके करना का अभ्यास हो जाता है।

स्वस्थ एवं सामान्यतया रोगग्रस्त व्यक्तियों को प्रतिदिन 5 मिनट भस्त्रिका का अभ्यास करना चाहिए। कैंसर, लग फाइब्रोसिस, मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी, एम. एस., एस.एल.ई. एवं अन्य असाध्य रोगों में 10 मिनट तक अभ्यास करना चाहिए। भस्त्रिका एक मिनट में 12 बार, इसी प्रकार पाँच मिनट में 60 बार अभ्यास हो जाता है। कैंसर आदि असाध्य रोगों में 2 आवृत्ति करने पर 120 बार प्राणायाम होता है।

सामान्यतः प्राणायाम खाली पेट किया जाये तो उत्तम है। किसी कारणवश प्रात: प्राणायाम नहीं कर पायें तो दोपहर के खाने के 5 घंटे बाद भी प्राणायाम किया जा सकता है। असाध्य रोगी प्रातः सायं दोनों समय प्राणायाम करें तो रोगी को शीघ्र ही अधिक लाभ होगा।

Pranayam – Pranayam Kaise Kare

भस्त्रिका के समय मन में विचार

भस्त्रिका प्राणायाम में श्वास को अन्दर भरते हुए मन में विचार (संकल्प) करना चाहिए कि ब्रह्माण्ड में विद्यमान दिव्य शक्ति ऊर्जा, पवित्रता, शान्ति और आनन्द आदि जो भी शुभ है, वह प्राण (श्वास) के साथ मेरे देह (शारीर) में प्रवेश हो रहा है। मैं परम पिता परमेश्वर की दिव्य शक्तियों से ओत-प्रोत हो रहा हूँ। इस प्रकार दिव्य संकल्प के साथ किया हुआ प्राणायाम हमारे शारीर और मन के लिए विशेष लाभप्रद होता है।

भस्त्रिका प्राणायाम करने के लाभ Bhastrika Pranayama Benefits

  • सर्दी-जुकाम, एलर्जी, वासरोग, दमा, पुराना नजला, साइनस आदि समस्त कफ रोग दूर होते है।
  • फेफड़े मजबूत बनते हैं।
  • हृदय और मस्तिष्क को भी शुद्ध प्राणवायु मिलने से आरोग्य लाभ होता है।
  • थायरॉयड एवं टॉन्सिल आदि गले के समस्त रोग दूर होते हैं।
  • त्रिदोष सम होते हैं।
  • रक्त शुद्ध होता है।
  • शरीर के विषाक्त विजातीय द्रव्यों का निष्कासन होता है।
  • प्राण और मन स्थिर होते हैं।
  • यह प्राणोत्थान और कुण्डलिनी जागरण में सहायक है।

भस्त्रिका प्राणायाम करते समय सावधानियां

जिनको उच्च रक्तचाप तथा हृदयरोग हो, उन्हें तीव्र गति से भस्त्रिका नहीं करनी चाहिए।

भस्त्रिका प्राणायाम को करते समय जब श्वास को अन्दर भरे तब पेट नहीं फुलाना चाहिए। श्वास डायाफ्राम तक भरें, इससे पेट नहीं फूलेगा, पसलियों तक छाती ही फूलेगी। डायाफ्रैग्मेटिक डीप ब्रीदिग का नाम ही भस्त्रिका प्राणायाम है।
ग्रीष्म ऋतु में धीमी गति से करें।

कफ की अधिकता या साइनस आदि रोगों के कारण जिनके दोनों नासाछिद्र ठीक से खुले हुए नहीं होते, उन लोगों को पहले दायीं नाशिका को बन्द करके बायीं नाशिक से श्वास लेना और छोड़ना चाहिए। फिर बायें को बन्द करके दायें मे यथाशक्ति मन्द, मध्यम या तीव्र गति से श्वास लेना और छोड़ना चाहिए । फिर, अन्त में दोनों स्वरों इडा एवं पिंगला से रेचक पूरक करते हुए भस्त्रिका प्राणयाम करें।

इस प्राणायाम को पाँच मिनट तक प्रतिदिन निश्चित ही करनी चाहिए।

प्राणायाम की क्रियाओं को करते समय हमेशा ही आँखों को बन्द रखनी चाहिए।

भस्त्रिका प्राणायाम करते समय मन में प्रत्येक धास-प्रश्वास के साथ ‘ओम’ का मानसिक रूप से चिन्तन और मनन करना चाहिए।

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