Pranayam – Pranayam Kaise Kare, Karne Ki Vidhi, Karne Ke Labh

हम सभी हमेशा ही अपने शरीर को स्वस्थ, सुन्दर और उर्जावान रखना चाहते हैं। हम अक्सर अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए तरह तरह के व्यायाम, आहार और जीवन शैली अपनाते है तो आइये जानते है प्राणायाम के बारे में की Pranayam, Pranayam Kaise Kare, Karne Ki Vidhi, Pranayam Karne ke labh कैसे हम इसे नियमित रूप से करके अपने शरीर को स्वस्थ, सुन्दर और उर्जावान रख सकते है।

Pranayam Kya Hai – प्राणायाम क्या है

प्राणायाम दो शब्द प्राण और आयाम से मिलकर बना है। जहाँ प्राण का अर्थ श्वास और आयाम का अर्थ नियंत्रण से है, अर्थात प्राणायाम का अर्थ है श्वास पर नियंत्रण। हमारे शरीर में जितनी भी क्रियाएं होती है उन सभी का हमरे प्राण श्वास से किसी न किशी रूप में सम्बन्ध जरुर होता है। हमारे जीवन और मृतु के बीच का अन्तर भी इसी प्राण के कारण ही बना हुआ है। हमारे वेद, शास्त्र और उपनिषदों में भी हमारे इस प्राण की अनंत विशेषताओं का वर्णन मिलता है।

शास्त्रों में ऐसा कहा गया है की जैसे आग में सोना जैसे धातुओं को तपाने से उन धातुओं के सभी मल और विकार दूर हो जाते हैं ठीक वैसे ही प्राणायाम के नियमित रूप से करने से हमारे मन एवं शरीर के सरे दोष दूर हो जाते हैं।

Pranayam Kaise Kare – प्राणायाम कैसे करें

  • प्राणायाम शुद्ध एवं स्वच्छ स्थान पर करना चाहिए, यदि सम्भव हो तो किसी नदी अथवा तलब के समीप बैठकर अभ्यास करना चाहिए।
  • शहरों में जहाँ प्रदूषण ज्यादा होता है, उस स्थान को प्राणायाम से पहले घृत एवं गुग्गुलु से सुगन्धित कर लेना चाहिए या घी के दीपक जलाना चाहिए।
  • प्राणायाम के लिए सिद्धासन सुखासन या पद्मासन में मेरुदण्ड को सीधा रखकर बैठना चाहिए।
  • बैठने के लिए जिस आसन का प्रयोग करते हैं, वह विद्युत् का कुचालक होना चाहिए, जैसे कम्बल या कुशासन आदि, जो लोग जमीन पर नहीं बैठ सकते वे कुर्सी पर बैठकर भी प्राणायाम कर सकते हैं।
  • प्राणायाम से पूर्व कम से कम तीन बार ‘ओ३म्’ का लम्बा उच्चारण करना चाहिए। प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए गायत्री, महामृत्युंजय या अन्य वैदिक मंत्रों का विधिपूर्वक उच्चारण या जप करना आध्यात्मिक दृष्टि से लाभ पहुचाता है।
  • प्राणायाम करते समय मुख, आँख, नाक आदि अंगों पर किसी प्रकार तनाव न लाकर सहजावस्था में रखना चाहिए।
  • प्राणायाम करते समय श्वास को बलपूर्वक नहीं रोकना चाहिए।
  • प्राणायाम का अभ्यास धीरे-धीरे बिना किसी उतावली के, धैर्य के साथ, सावधानी से करना चाहिए।
  • प्राणायाम करते समय श्वास को सदैव नाक से ही लेना चाहिए।
  • प्राणायाम शौचादि नित्यकर्म से निवृत्त होकर करना चाहिए।
  • प्राणायाम करते समय मुख, आँख, नाक आदि अंगों पर किसी प्रकार तनाव न लाकर सहजावस्था में रखना चाहिए।
  • प्राणायाम करते समय मन शान्त एवं प्रसन्न होना चाहिए।

Pranayam karne ke Labh – प्राणायाम करने के फायदे

  • रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है।
  • पाचनतन्त्र पूर्ण स्वस्थ हो जाता है एवं समस्त पेट सम्बन्धी बीमारी दूर होते हैं।
  • हृदय, फेफड़े एवं मस्तिष्क सम्बन्धी समस्त रोग दूर होते हैं।
  • मोटापा, मधुमेह, कॉलेस्ट्रॉल, कब्ज, गैस, अम्लपित्त, श्वास रोग, एलर्जी माइग्रेन, रक्तचाप, किडनी के रोग, पुरुष और स्त्रियों के समस्त यौन रोग, सामान्य रोगों से कैन्सर तक सभी साध्य असाध्य रोग दूर होते हैं।
  • वंशानुगत डायबिटीज एवं हृदयरोग जैसे रोगों से बचा जा सकता है।
  • मुख पर आभा, ओज, तेज एवं शान्ति आयेगी।
  • मन अत्यन्त स्थिर, शान्त और प्रसन्न और उत्साहित रहता है।
  • डिप्रेशन, अवसाद और तनाव जैसे रोगों दूर हो जाते हैं।
  • नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं।
  • प्राणायाम का अभ्यास करने वाला व्यक्ति सदा सकारात्मक विचार, ऊर्जा एवं आत्मविश्वास से भरा हुआ होता है।
  • प्राणायाम का अभ्यास करने से शरीर के समस्त विकार, विजातीय तत्त्व, टाक्सिन्स नष्ट हो जाते हैं।
  • प्राणायाम का अभ्यास करने से बालों का झड़ना और सफेद होना, चेहरे पर झुर्रियां पड़ना, नेत्रज्योति के विकार, स्मृति-दौर्बल्य आदि से बचा जा सकता है, अर्थात् बुढ़ापा देर से आयेगा तथा आयु बढ़ेगी।
  • प्राणायाम का अभ्यास करने सेवात, पित्त और कफ, इन तीनों दोषों का संतुलन होता है।

प्राणायाम के लिए आवश्यक निर्देश Pranayam – Pranayam Kaise Kare

  • प्राणायाम करते हुए थकान अनुभव हो तो बीच-बीच में थोड़ा सूक्ष्म व्यायामया विश्राम कर लेना चाहिए।
  • प्राणायाम के दीर्घ अभ्यास के लिए संयम व सदाचार का पालन करना चाहिए। दूध, घृत, बादाम एवं फलों का उचित मात्रा में प्रयोग लाभप्रद होता है।
  • प्राणायाम के बाद स्नान करना हो तो 10-15 मिनट बाद स्नान करना चाहिए।
  • प्राणायाम करने के 10-15 मिनट बाद प्रात: जूस, अंकुरित अन्न या अन्य खाद्य पदार्थ लेना चाहिए।
  • प्राणायाम करने के तुरंत बाद चाय, कॉफी या अन्य मादक, उत्तेजक या नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • प्राणायाम के बाद दूध, दही, छाछ लस्सी, फलो का जूस, हरी सब्जियों का जूस, पपीता, सेब, अमरूद या चेरी आदि फलों का उपयोग करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को कपालभाति, बाह्य प्राणायाम एवं अग्निसार क्रिया को छोड़कर अन्य सभी प्राणायाम और बटरफ्लाई आदि सूक्ष्म व्यायाम धीरे-धीरे करना चाहिए।
  • माहवारी के समय महिलाओं को बाह्य प्राणायाम व कठिन आसन नहीं करने चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप व हृदयरोग से पीड़ित व्यक्ति को सभी प्राणायामों का अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए।
  • किसी भी ऑपरेशन के बाद कपालभाति प्राणायाम 4 से 6 माह बाद करना चाहिए।

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