योग क्या है, योग का इतिहास, योग के प्रकार, प्रभाव और लाभ What is Yoga

योग क्या है? What is Yoga

योग Yoga एक ऐसा शब्द जिसे हम बचपन से अंकगणित में जोड़ या जोड़ने से समझते आए हैं लेकिन हम यहां जिस योग की बात कर रहे हैं उसका संबंध हमारी आध्यात्मिक एवं शारीरिक क्रियाओं से है। एक ऐसी शारीरिक क्रिया जिसे करने से हमारा शरीर मन और आत्मा एक लय में होकर परमात्मा से जुड़ जाएं वह योग है।

योग शब्द भारतीय उपनिषदों, गीता, पुराणों एवं वेदों में भी प्राचीन काल से ही व्यवहार में रहा है, भारतीय दर्शन में भी योग एक महत्वपूर्ण शब्दावली है। महर्षि व्यास जी योग का अर्थ समाधि को बताते हैं। गीता में भी योगेश्वर श्री कृष्ण ने भी योग शब्द का उपयोग विभिन्न अर्थों में किया है।

जैन मुनियों के अनुसार जिन साधनों से आत्मा की सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है वह योग है।

योग का इतिहास : History of Yoga

योग का इतिहास जितना प्राचीन है उतना ही प्रासंगिक भी यह इतना प्राचीन है कि इसका वर्णन भारत के लगभग सभी प्राचीनतम ग्रंथों, पुराणों और उपनिषदों आदि में मिलता है।

ऐसा माना जाता है कि योग का सर्वप्रथम ज्ञान ऋषियों को योगेश्वर भगवान महादेव से मिला आज भी भगवान महादेव की हमें कई ऐसी प्रतिमाएं देखने को मिल जाती है। जिसमें में वे समाधि, योग निद्रा या नटराजन स्वरूप में होते हैं।

गीता में भी योगेश्वर श्रीकृष्ण ने योग के कई रूपों जैसे ध्यान योग, संख्ययोग एवं कर्मयोग आदि का वर्णन करते हैं। प्राचीन काल में अनेक ऋषि यों ने भी योग को अपनी-अपनी भाषाओं एवं रूपों में परिभाषित किया है।

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योग के प्रकार : Types of Yoga

योगशास्त्र एवं योगराज जैसे उपनिषदों में मंत्रयोग, लययोग, हठयोग एवं राजयोग के रूप में योग को चार प्रकार में बांटा गया है।

1. मंत्रयोग-

इसमें साधक द्वारा मंत्रों को 12 वर्षों तक विधि पूर्वक जपने से लघिमा, गणिमा आदि सिद्धियां साधक को प्राप्त हो जाती है।

2. लययोग

इसमें साधक अपने दैनिक क्रियाओं को करते हुए सदैव ईश्वर का ध्यान करता रहता है जिसे लययोग कहते हैं।

3. हठ

योग साधक द्वारा विभिन्न मुद्राओं आसन प्राणायाम एवं बांधो का नियमित अभ्यास कर शरीर को निर्बल एवं मन को एकाग्र करना हठ योग कहलाता है।

4. राजयोग

साधक द्वारा यम नियम आदि के नियमित अभ्यास से मन का निर्मल कर परमात्मा का साक्षात्कार करना राजयोग कहलाता है।

योग का शरीर पर प्रभाव : The effect of Yoga on our body

योग का अर्थ है अपने अंदर नहीं शक्तियों का बोध कर उसे विकसित करके परमात्मा को प्राप्त करना है। यौगिक प्रक्रिया में विविध प्रकार की क्रियाओं का विधान भारतीय ऋषि मुनियों ने किया है मुख्य रूप से अष्टांग योग के अंतर्गत वर्णित आसन प्रणाम महत्वपूर्ण है। इन सब क्रियाओं से हमारी सुप्त चेतना शक्ति का विकास होता है। तंतुओं का पुनर्जागरण होता है एवं नए तंतुओं, कोशिकाओं और ऊतकों का निर्माण होता है।

यौगिक सूक्ष्म क्रियाओं द्वारा हमारे सूक्ष्म स्नायु तंत्र मजबूत होता है। जिससे में ठीक प्रकार से रक्त संचरण होने लगता है, और नई शक्ति का विकास होने लगता है योग से रक्त संचार पूर्ण रूप से सम्यक होने लगता है।
योग के द्वारा शरीर के संकुचन एवं प्रसारण होने से उसके शक्ति का विकास होता है तथा रोगों का नाश होता है।
योगासन एवं प्राणायाम के द्वारा शरीर की ग्रंथियां एवं मांस पेशियों में कर्षण – विकर्षण, संकुचन – प्रसारण तथा शिथिलीकरण की क्रियाओं द्वारा सभी अंगो का आरोग्यता बढ़ता है।

योग करने के लाभ : Benefits of doing Yoga

यौगिक क्रिया करने से रक्त को वहन करने वाली धमनी एवं शिरा है स्वस्थ होती हैं। आसन एवं योगिक क्रियाओं से पेनक्रियाज एक्टिव होता होता है, और इंसुलिन संतुलित मात्रा में बनने लगता है जिससे मधुमेह जैसे रोग दूर होते हैं। योग करने से पाचन तंत्र स्वस्थ होता है जिससे संपूर्ण शरीर स्वस्थ हल्का एवं स्फूर्ति युक्त बन जाता है।

योग से हृदय रोग जैसी भयंकर बीमारी से भी छुटकारा पाया जा सकता है। फेफड़ों में पूर्ण स्वस्थ वायु का प्रवेश होता है जिसे फेफड़े स्वस्थ होते हैं तथा दमा श्वास एलर्जी आदि रोगों से छुटकारा मिलता है। फेफड़ों में स्वस्थ हो जाती है तो उसे हुए को भी बल मिलता है। योग क्रियाओं का पाचन होकर शरीर का भार कम होता है तथा शरीर स्वस्थ एवं सुंदर बनता है।

योग करने के आध्यात्मिक लाभ भी हैं योग करने वाले व्यक्ति के शरीर में दिव्य आध्यात्मिक तेज एवं ऊर्जा का आभास होता हैयोग इसके अंदर के सारे नकारात्मक भाव स्वता ही दूर हो जाते हैंयोग चिंता और अवसाद जैसे बीमारी सहज ही दूर हो जाते हैं।

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